23 सितम्बर को गोधरा में धर्मरिनपेक्षता के प्रति प्रतिबद्ध अनेक सांस्क्रतिक, साहित्यक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शहर के शहीद चोंक पर एकत्रित होकर देश में शांति , सौहार्द, सदभावना व भाईचारा बनाये रखने की अपील की। सभी संगठनों के प्रतिनिधि हाथों में मोमबतिया लेकर खड़े थे जो की शांति व सदभावना प्रतीक है । प्रदर्शन में एक नारा शामिल था, जो था कि ‘‘ समाज में शांति व सदभावना के लिए हम सब साथ हैं ’’। इस पहल पर गोधरा शहर के अनेक संगठनों, अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान कार्यकर्ताओं तथा शहर के अमन पसंद नागरिकों ने सर्वप्रथम वीर सावरकर की मूर्ति पर एकत्रित होकर वहां लोगों से शांति ,सदभावना व भाईचारा बनाये रखने की अपील की। इसके बाद शाम ६ बजे चौराहे के पास एकत्रित होकर लोगों से अमन कायम रखने की अपील की। कार्यक्रम में उपस्थ्ति लोगों को वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान के अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रहलाद कुमार अग्रवाल ( रविदासिया ) , और गोधरा परचारक श्री अश्वनी गर्ग आदि ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अदालत का फैसला चाहे कुछ भी हो वह सबको शांति से रहना चाहिए व सभी को संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। हमारें संविधान की भी यही अपेक्षा है कि अदालत के फैसले देश के सभी नागरिकों को एक नजर से देखे । कोई भी व्यक्ति या संगठन देश के संविधान से ऊपर नहीं है। पर सविधान निर्माताओ को हिन्दू धर्म से नफरत थी ये बात हिन्दू नागरिको के मन से निकालने प्रयाश करना चाहिए उस का यह सब से अच्हा मोका है सभी वक्ताओं ने इस संवेदनशील अवसर पर प्रशासन द्वारा की जाने वाली सख्ती का स्वागत करते हुए मांग की कि उपद्रवियों पर बिना किसी भेदभाव के नजर रखना चाहिए। जो भी समाज में शांति भंग करने का प्रयास करे उसके खिलाफ त्वरित व सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। साम्प्रदायिक संगठनों व उनसे जुड़े लोगों पर पैनी नजर रखी जाए और उनके विरूद्ध भी आवयसक कानूनी कार्यवाही की जाए। देश में शांति व सदभाव के लिए अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया यह प्रयाश दुनिया भर मे चर्चा का विषय बना हुआ है . एक ओर जहा २४ सितम्बर को आने बाले अदालत के फैसले से कट्टर पंथियों से दुनिया भर मे लोग खोफ्फ़ जदा है , अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया यह प्रयाश अच्चा है .
अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान कार्यकर्ताओं को अपील करते हुए कहा की धर्म योधा को अपनी ताकत दिखाने का समय आ गया है . बो साम्प्रदायिक संगठनों व उनसे जुड़े असमाजिक लोगों पर पैनी नजर रखे बो लोग हिंदुस्तान सहित दुनिया भर मे अफबाहो का सहारा लेकर ओर भोले भाले लोगो को भड़काकर फसले की आड़ मे दंगा भड़का सकते है . जिस्हे आप ने अपनी सूझ भुझ से रोकना है . ओर मासूम नागरिको को उनका शिकार होने से बचाना है . यह आप की परीक्षा की घड़ी है . साथ ही उन्होंने सभी हिन्दू नागरिको के अनुरोध पर राजेश बिड़कर जी की रिहाई की बात National Human Rights Commission और विश्व के समने रखने का अस्वाशन दिया . और थोडा हँसते हुए कहा की यह तो उन्हें नेता जी बननेहेतु जरूरी था असली नेता जी तो बलिदान से ही बनते है . पत्रकार साथियों को अपने अपील मे उन्होंने बताया की विदेश/ प्रदेश में शहरों से लेकर गांवों तक में अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान के पर्चे पहुचाया गया हैं। इन पर्चों के जरिए आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा को एकजुट करने की मुहिम चलाई गई है। इन पर्चों में अंतरराष्ट्रीय आत्मरक्षक हिंदू धर्मयोध्दा भर्ती अभियान का अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ( रविदासिया )को बताया गया है। संयोजक प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने प्रेस मीडिया को बताया कि उनका अभियान आतंकवाद के खिलाफ हिंदुओं को एकजुट करने का काम करेगा और उनका लक्ष्य हिंदू धर्मयोध्दा की धारण को मजबूत करना हैं। जिस की प्रेरणा उन्हें श्री गुरु गोविन्द सिंह श्री छत्रपती शिवाजी महाराज जी से मीली है उन्होंने आगे कहा कि यह अभियान हिन्दू दमन गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ दोषी व्यक्तियों को कठोर दंड दिये जाने की मांग करेगा। ओर सरकार होते अत्याचार होते है और सरकार को पता है, लेकिन वह तो तमाशा देखती है,. उस हालत मे हिंदू धर्मयोध्दा श्री गुरु गोविन्द सिंह श्री छत्रपती शिवाजी महाराज जी से मीली प्रेरणा से मासूम हिन्दुओ की रक्षा करेगे ।गृहमंत्री पी चिदंबरम के भगवा आतंकवाद पर की गई टिप्पणी के संबंध में पूछे गए सवाल में अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने कहा कि भगवा आतंकवाद का रंग हो ही नहीं सकता। भगवा शौर्य का प्रतीक है इतिहास इस बात का गवाह है।भगवा ध्वज भारत का ऐतिहासिक एवं सांस्कृति ध्वज है। यह हिन्दुओं के महान प्रतीकों में से एक है। हजारों हजारों सालों से भारत के हिंदू धर्मयोध्दा ने इसी भगवा ध्वज की छाया में लड़कर हिन्दुओं की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किये लेकिन अंग्रेजों और मुगलों ने इसी हिन्दुत्व को कुचलते हुए भारतवर्ष में राज्य किया किया। अनेक डकैत और खलासी यहां आकर राजा या बादशाह बन गये। अंग्रेजों/मुगलों ने तो अपनी ऐसी शिक्षा पद्धति का निर्माण किया जिससे कि यहां का आदमी उनके जाने के बाद भी उनकी गुलामी कर रहा है। देश के शिक्षित युवक युवतियां इस बात के लिये बेताब रहते हैं कि कब उनको अवसर मिले और अमेरिका या ब्रिटेन में जाकर वहां के निवासियों की गुलामी का अवसर मिले। हमारे नेताओ को हिंदी न आ कर हम अत्याचार करने वाले अंग्रेजों और मुगलों की बोली बोलते है .
उन्होंने पूछा कि धर्मयोध्दा भगत सिंह सुखदेव व राजगुरु ने यह भक्तिगीत गा कर क्या भगवा आतंकवाद भड़काया था। मेरा रंग दे बसंती चोला, माये रंग दे मेरा रंग दे बसंती चोला दम निकले इस देश की खातिर बस इतना अरमान हैएक बार इस राह में मरना सौ जन्मों के समान है देख के वीरों की क़ुरबानी अपना दिल भी बोलामेरा रंग दे बसंती चोला ...जिस चोले को पहन शिवाजी खेले अपनी जान पेजिसे पहन झाँसी की रानी मिट गई अपनी आन पे आज उसी को पहन के निकला हम मस्तों का टोला मेरा रंग दे बसंती चोला ... और अपनी बात ख़त्म करइस मुद्दे पर गृहमंत्री पी चिदंबरम को एक बार फिर सवालों के घेरे मे लीया है।
अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रह्लाद कुमार अग्रवाल (रविदासिया ) B58/149 गुरु नानक पूरा लक्ष्मी नगर डेल्ही
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